ब्रह्ममुहूर्त से शुरुआत और नौकरशाही पर कड़ा हंटर, योगी आदित्यनाथ के कड़े अनुशासन ने पेश की नजीर
लखनऊ। एक समय था जब उत्तर प्रदेश की सियासत में सत्ता को केवल अधिकार, रसूख और भोग का साधन समझा जाता था। लेकिन पिछले लगभग एक दशक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अविचल कर्तव्य पथ पर चलना इस बात का ज्वलंत प्रमाण है कि ‘कर्मयोग’ केवल व्यक्तिगत साधना नहीं, बल्कि संपूर्ण व्यवस्था सुधार का एक सशक्त माध्यम बन सकता है।
गोरक्षपीठ की सुदीर्घ परंपरा से निकलकर देश के सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य की कमान संभालने वाले योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू’ श्रेणी से बाहर निकालकर विकास के एक नए मॉडल के रूप में स्थापित किया है।
1. अनुशासन और कड़ा राजधर्म: खुद का उदाहरण पेश किया
गीता में कहा गया है कि आसक्ति रहित होकर निरंतर कर्तव्य का पालन करने वाला व्यक्ति ही श्रेष्ठ लक्ष्य को प्राप्त करता है। योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है:
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ब्रह्ममुहूर्त में शुरुआत: प्रातःकाल योग, नित्य पूजा-अर्चना और उसके तुरंत बाद बिना किसी विराम के प्रशासनिक बैठकें।
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जवाबदेही का बोध: जो नेतृत्व स्वयं अनुशासित होता है, वही व्यवस्था को अनुशासित कर सकता है। दशकों से अकर्मण्यता और भ्रष्टाचार में जकड़ी नौकरशाही में आज यदि समयबद्धता और जवाबदेही है, तो यह उनके कड़े अनुशासन का ही नतीजा है।
2. अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस: बदला सूबे का मानस
भारतीय चिंतन में राजधर्म का अर्थ केवल कागजी प्रशासन नहीं, बल्कि दुष्टों का दमन और सज्जनों की रक्षा है।
“निसिचर हीन करउँ महि भुज उठाइ पन कीन्ह” की तर्ज पर योगी सरकार ने प्रदेश की जड़ों को खोखला कर रहे माफिया तंत्र के विरुद्ध निर्णायक कदम उठाए। उत्तर प्रदेश का नाम सुनते ही कभी लोगों के मन में जो भय आता था, आज वह विश्वास में बदल चुका है। इसी कानून-व्यवस्था के ‘इकबाल’ के कारण राज्य में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश संभव हो पाया है।
3. विकास और विरासत: सांस्कृतिक पुनर्जागरण का नया अध्याय
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने विकास का नया व्याकरण तो लिखा ही, साथ ही अपनी सांस्कृतिक स्मृतियों से संवाद भी स्थापित किया:
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अयोध्या और काशी का कायाकल्प: अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के साथ अवसंरचनात्मक विकास और काशी विश्वनाथ धाम का पुनरोद्धार इसका जीवंत उदाहरण हैं।
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धार्मिक पर्यटन से अर्थव्यवस्था: पहले इस बात की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी कि आस्था भी अर्थव्यवस्था का एक बड़ा आधार हो सकती है। आज यूपी के छोटे-छोटे धार्मिक स्थल भी स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था की धुरी बन चुके हैं।
4. एक्सप्रेस-वे और कनेक्टिविटी का महाजाल
आज उत्तर प्रदेश की धमनियों में एक्सप्रेस-वे और नए रूट्स रक्त की तरह गति का संचार कर रहे हैं।
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एक्सप्रेस-वे: अब केवल सड़कें नहीं, बल्कि आर्थिक प्रगति के कॉरिडोर हैं।
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एयरपोर्ट्स व मेडिकल कॉलेज: नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स संभावनाओं के आकाशद्वार बन रहे हैं और हर जिले में मेडिकल कॉलेज जनविश्वास की जीवनरेखा बन चुके हैं।
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पारदर्शी रोजगार: शुचितापूर्ण और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत 10 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी सेवा मिली है, जिसने युवाओं को फिर से बड़े सपने देखने का हौसला दिया है।
निष्कर्ष: राजनीति से ऊपर कर्तव्य की साधना
उत्तर प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी’ बनाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे योगी आदित्यनाथ के भीतर का संन्यासी ही उनके भीतर के प्रशासक को दिशा देता है। एक तरफ अपराध के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस का कठोर संकल्प और दूसरी तरफ ‘जनता दर्शन’ में घंटों खड़े रहकर किसी पीड़ित की व्यथा सुनकर द्रवित हो जाने वाला कोमल हृदय—यही द्वंद्व उन्हें एक राजनेता से ऊपर उठाकर करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं का प्रतीक बनाता है।
