आपदा के डर से कार्लीगाड़ के ग्रामीणों ने छोड़ा अपना गांव, किराए का कमरा लेकर रहने को मजबूर
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से महज 20 किलोमीटर दूर कार्लीगाड़ गांव के ज्यादातर ग्रामीण आपदा के डर से शिफ्ट हो गए हैं. ज्यादातर ग्रामाीणों ने अपना गांव छोड़ दिया है और अन्य सुरक्षित जगह पर किराए पर कमरा लेकर रह रहे हैं. कुछ लोग अभी भी मजबूरन गांव में रह रहे हैं. इस वक्त मानसून चरम पर है. ऐसे में वहां की क्या स्थिति है? इसे जानने के लिए ईटीवी भारत की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया. साथ ही ग्रामीणों की समस्याओं को भी सुना.
साल 2025 में बारिश ने मचाई थी तबाही: दरअसल, साल 2025 में कार्लीगाड़ गांव में मानसून के दौरान बादल फटने की घटना हुई थी. जिसके चलते ग्रामीणों को काफी ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा था, लेकिन वर्तमान स्थिति ये है कि लगातार हो रही भारी बारिश के चलते कार्लीगाड़ को जोड़ने वाला सड़क मार्ग भी वॉशआउट हो गया है. साथ ही गांव में चारों तरफ फैले मलबे की वजह से ग्रामीणों ने गांव को छोड़ना ही बेहतर समझा.
उत्तराखंड में हर साल मानसून सीजन के दौरान प्रदेश के तमाम क्षेत्रों आपदा जैसे हालात बनते हैं. वर्तमान स्थिति ये है कि पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश के चलते प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. कहीं भूस्खलन की वजह से सड़के बाधित हैं, तो कहीं सड़क पूरी तरह से वॉशआउट हो गया है.जिसके चलते ग्रामीणों को आवाजाही में तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
देहरादून के घंटाघर से करीब 20 किलोमीटर दूर है कार्लीगाड़ गांव: ऐसी ही कुछ स्थिति देहरादून के घंटाघर से करीब 20 किलोमीटर दूर कार्लीगाड़ गांव की भी बनी हुई है. जहां पिछले महीने मलबा हटाया गया था और रास्ता बनाया गया था. ताकि, ग्रामीणों को आवाजाही में दिक्कत न हो, लेकिन बनाया गया मार्ग भारी बारिश और नदी का जलस्तर बढ़ने से वॉशआउट हो गया.
दरअसल, पर्यटक स्थल सहस्त्रधारा से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित कार्लीगाड़ गांव में पिछले साल सितंबर महीने में बादल फटने की घटना हुई थी. जिसके चलते इस गांव में रह रहे लोगों के मकानों, वाहनों की क्षति हुई थी. साथ ही चारों तरह काफी ज्यादा मलबा फैल गया था. जिसके चलते ग्रामीण मानसून से पहले व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की मांग कर
सुरक्षात्मक काम तो शुरू हुआ, लेकिन मानसून की वजह से बंद करना पड़ा काम: इसी को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से इस मानसून शुरू होने से पहले जून महीने में सुरक्षात्मक काम शुरू किए गए, लेकिन काम पूरा होने से पहले ही मानसून ने दस्तक दे दी. जिसके चलते काम को बंद कर दिया गया, लेकिन पिछले कुछ दिनों में हुई भारी बारिश के चलते गांव की स्थिति जस की तस बन गई है.
गांव को जोड़ने वाली सड़क वॉशआउट: इतना ही नहीं गांव को जोड़ने वाली सड़क मार्ग भी वॉशआउट हो गई है. जिसके चलते ग्रामीणों का संपर्क मार्ग टूट गया है. हालांकि, इस गांव में रहने वाले ज्यादातर ग्रामीणों ने अपनी सुरक्षा को देखते हुए गांव को छोड़ दिया है. साथ ही सहस्त्रधारा और मालदेवता की तरफ कमरा किराए पर लेकर रह रहे हैं.
जिनके पास मवेशी हैं, वो अभी भी गांव में मौजूद: वहीं, कुछ परिवार ऐसे हैं, जिनके पास पशु हैं, वो अभी भी गांव में मौजूद हैं, लेकिन अब वो गांव से बाहर नहीं जा सकते है. क्योंकि, गांव से बाहर निकलने के लिए कोई सड़क मार्ग मौजूद नहीं है. इसके अलावा मवेशियों को किराए कमरे या अन्य जगहों पर रख नहीं सकते हैं. इस वजह से वो अभी भी गांव में है.
“कार्लीगाड़ गांव में आपदा का खतरा है. जिसके चलते सभी गांव के लोगों ने गांव को खाली कर दिया है. क्योंकि, गांव को दोनों तरह से खतरा है. इसके साथ ही गांव को जाने वाली पुल भी टूट गया है. ऐसे में मानसून सीजन के दौरान ये सभी गांववासी बाहर ही रहेंगे.“- सुखलाल, ग्रामीण
