देहरादून: शीतलहर और हिमस्खलन से निपटने को तैयार उत्तराखंड, सीएम धामी ने जारी की SOP और आपदा प्रबंधन कैलेंडर 2026
देहरादून: शीतलहर और हिमस्खलन से निपटने को तैयार उत्तराखंड, सीएम धामी ने जारी की SOP और आपदा प्रबंधन कैलेंडर 2026

देहरादून | 09 जनवरी, 2026
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को हाथीबड़कला स्थित सर्वे ऑफ इंडिया ऑडिटोरियम में ‘शीतलहर पूर्व तैयारी’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शीतलहर, बाढ़, मॉक अभ्यास और हवाई यातायात सहायता से संबंधित SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) का विमोचन किया। साथ ही आपदा प्रबंधन विभाग का नववर्ष कैलेंडर 2026 और आपदा प्रबंधन हस्तपुस्तिका भी जारी की गई।
आपदा प्रबंधन सामूहिक जिम्मेदारी: पुष्कर सिंह धामी
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल एक विभाग का काम नहीं, बल्कि इसमें प्रशासन, स्थानीय निकायों और जनता की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार आधुनिक तकनीकों जैसे- ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग और अर्ली वार्निंग सिस्टम को सुदृढ़ कर रही है।

शीतलहर और हिमस्खलन के लिए सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य में हिमस्खलन (एवलांच) एक गंभीर जोखिम है। उन्होंने अधिकारियों को निम्नलिखित निर्देश दिए:

स्वास्थ्य सेवाएं: जिला अस्पतालों और मोबाइल मेडिकल टीमों को सक्रिय रखा जाए ताकि हाइपोथर्मिया और निमोनिया जैसी समस्याओं का तुरंत समाधान हो सके।

बचाव प्रबंध: ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेंसर और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम बढ़ाए जाएं। साथ ही रैन बसेरों, अलाव और कंबलों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

सामुदायिक सहभागिता: ‘युवा आपदा मित्र’ और ‘आपदा सखी’ जैसी पहलों को और सशक्त बनाया जाएगा।
सराहनीय कार्य करने वाले हुए सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वर्ष 2025 में आपदा राहत कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले लोगों और आपदा मित्रों को सम्मानित किया। उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) द्वारा आपदा प्रबंधन के लिए उपलब्ध कराए गए चार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
प्रशासनिक और सामाजिक दायित्व है आपदा प्रबंधन: मुख्य सचिव
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि शीतलहर का प्रभाव धीरे-धीरे लेकिन भयावह होता है। इसे केवल मौसमी चुनौती नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक और सामाजिक दायित्व के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य में आपदा प्रबंधन को नीति-आधारित और संगठित स्वरूप दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में उपस्थिति:
इस अवसर पर एनडीएमए के सदस्य राजेन्द्र सिंह, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विनय रोहिला, सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, आनंद स्वरूप, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
