मुख्यमंत्री धामी ने सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स से किया संवाद
वेडिंग डेस्टिनेशन, फिल्म शूटिंग, पर्यटन और रिवर्स माइग्रेशन पर मुख्यमंत्री ने साझा किया सरकार का विजन, युवाओं के सुझावों का किया स्वागत
सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं, विशिष्ट खानपान, प्राकृतिक सौंदर्य, अनछुए पर्यटन स्थलों और स्थानीय उत्पादों को देश-दुनिया तक पहुंचाने में सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म की व्यापक पहुंच और युवाओं की रचनात्मक क्षमता के माध्यम से उत्तराखंड की पहचान को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित ‘शाइनिंग स्टार्स ऑफ उत्तराखंड-2026’ कार्यक्रम में राज्य प्रमुख सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर से संवाद कर रहे थे ।
कार्यक्रम में उत्तराखंड से जुड़े देश-विदेश में लोकप्रिय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, यूट्यूबर्स, कंटेंट क्रिएटर्स, अभिनेता, गायक तथा फिल्म और मनोरंजन जगत से जुड़े कलाकारों ने प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने युवाओं और कलाकारों के बीच पहुंचकर उनसे आत्मीय संवाद किया। उन्होंने उनके अनुभव सुने, विभिन्न विषयों पर पूछे गए सवालों के सहजता और विस्तार से जवाब दिए तथा उनकी रचनात्मकता, उपलब्धियों और प्रदेश के प्रति जुड़ाव की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण मुख्यमंत्री का युवाओं के साथ सहज, जीवंत और ऊर्जावान संवाद रहा। मुख्यमंत्री ने केवल सरकार की योजनाओं और नीतियों की जानकारी ही नहीं दी, बल्कि अपने व्यक्तिगत अनुभवों, राजनीतिक निर्णयों के पीछे की सोच, उत्तराखंड के विकास की संभावनाओं और भविष्य के विजन को भी साझा किया। उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स को प्रदेश की विकास यात्रा का सक्रिय भागीदार बनने का आह्वान किया और कहा कि उनकी पहुंच, रचनात्मकता तथा डिजिटल माध्यमों पर लोगों के विश्वास का उपयोग उत्तराखंड की सकारात्मक पहचान को मजबूत करने में किया जा सकता है।
स्थानीय उत्पादों से लेकर पहाड़ के अनछुए पर्यटन स्थलों तक, कंटेंट क्रिएटर्स बन सकते हैं उत्तराखंड के ब्रांड एंबेसडर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की विशेषताओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए कंटेंट क्रिएटर्स के पास एक सशक्त मंच है। राज्य की संस्कृति, सभ्यता, रीति-रिवाज, लोककलाएं, पारंपरिक खानपान, प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक स्थल और ग्रामीण जीवन की विशिष्टताओं को रोचक एवं तथ्यपरक कंटेंट के माध्यम से करोड़ों लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन की संभावनाएं केवल मसूरी, नैनीताल, ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे प्रसिद्ध स्थलों तक सीमित नहीं हैं। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक ऐसे प्राकृतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और साहसिक पर्यटन स्थल हैं, जिनके बारे में देश-दुनिया के बहुत से लोग अभी पर्याप्त जानकारी नहीं रखते। मिलम और पिंडारी ग्लेशियर, चकराता, माणा, मलारी तथा अनेक दूसरे अनूठे स्थलों को डिजिटल माध्यमों से पहचान दिलाकर पर्यटन के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कंटेंट क्रिएटर्स की एक प्रभावशाली वीडियो, रील या यात्रा-कथा किसी ऐसे गांव अथवा पर्यटन स्थल को नई पहचान दे सकती है, जिसकी संभावनाओं से अभी बहुत कम लोग परिचित हैं। इससे पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने क्रिएटर्स से आग्रह किया कि वे उत्तराखंड की वास्तविक सुंदरता, स्थानीय लोगों की जीवनशैली, सांस्कृतिक विविधता और प्रदेश की सकारात्मक उपलब्धियों को अपनी रचनात्मकता के माध्यम से प्रस्तुत करें। उन्होंने यह भी कहा कि कंटेंट बनाते समय तथ्यों की पुष्टि अवश्य करें। केवल कुछ समय के लिए अधिक व्यूज प्राप्त करने के उद्देश्य से भ्रामक अथवा विवादित जानकारी प्रसारित करने से बचना चाहिए। दीर्घकालीन सफलता का आधार विश्वसनीयता, तथ्यपरकता और दर्शकों का विश्वास है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत आधार पर खड़ी पहचान ही व्यक्ति को लंबे समय तक आगे बढ़ने की शक्ति देती है। इसलिए कंटेंट क्रिएटर्स को अपनी विश्वसनीयता बनाए रखते हुए ऐसा काम करना चाहिए, जो समाज और प्रदेश के लिए सकारात्मक योगदान दे।
सोशल मीडिया से महिलाओं के उत्पादों को मिलेगा नया बाजार, ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ को वैश्विक पहचान दिलाने में करें सहयोग
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उत्तराखंड की महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय शिल्पकारों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि सोशल मीडिया इनके लिए बाजार तक पहुंचने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
उन्होंने कहा कि राज्य की महिलाएं कठिन परिस्थितियों के बावजूद उत्कृष्ट उत्पाद तैयार कर रही हैं। वे अपने परिवार और कृषि कार्यों की जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। आज अनेक महिलाएं अपने समूहों के जरिए न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अपने गांवों में भी आर्थिक बदलाव का माध्यम बन रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने, उनकी गुणवत्ता और पैकेजिंग को बेहतर बनाने तथा उन्हें व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ‘वन डिस्ट्रिक्ट, टू प्रोडक्ट्स’ जैसी पहल भी स्थानीय विशिष्टताओं को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स से कहा कि वे अपने वीडियो, रील और अन्य डिजिटल सामग्री में स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक शिल्प, हस्तनिर्मित वस्तुओं, पहाड़ी व्यंजनों और महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को भी स्थान दें। किसी स्थानीय उत्पाद की विशेषताओं, उसे बनाने वाले कारीगर की मेहनत और उससे जुड़े पारंपरिक ज्ञान को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना उस उत्पाद के लिए नए ग्राहक और बाजार तैयार कर सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से स्थानीय कुम्हारों, शिल्पकारों, पारंपरिक धातु के बर्तन बनाने वाले कारीगरों और ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को व्यापक पहचान मिल सकती है। इससे उनकी आय बढ़ाने, पारंपरिक हुनर को संरक्षित करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
राज्यहित और भावी पीढ़ियों का कल्याण बड़े निर्णयों का आधार : मुख्यमंत्री
कार्यक्रम के दौरान एक कंटेंट क्रिएटर ने मुख्यमंत्री से पूछा कि नकल विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता और मदरसा बोर्ड से संबंधित निर्णयों जैसे महत्वपूर्ण फैसले लेते समय उनका दृष्टिकोण क्या रहता है तथा वे संभावित प्रतिक्रियाओं और चुनौतियों का सामना किस प्रकार करते हैं।
इस प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री का दायित्व किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि पूरे राज्य और उसकी जनता के प्रति होता है। इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय पर विचार करते समय वे सबसे पहले यह देखते हैं कि उससे प्रदेश के लोगों का क्या हित होगा और आने वाले 25 से 50 वर्षों में उसका भावी पीढ़ियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि जब किसी निर्णय का उद्देश्य राज्य के भविष्य को बेहतर बनाना, समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत व्यवस्था तैयार करना हो, तो दृढ़ता के साथ आगे बढ़ना आवश्यक होता है। जनता का विश्वास और राज्यहित के प्रति प्रतिबद्धता कठिन निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करते हैं।
मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड ने इस दिशा में ऐतिहासिक पहल की है। उन्होंने बताया कि कानून तैयार करने की प्रक्रिया में व्यापक जनसुझाव लिए गए और लगभग तीन लाख लोगों के विचारों को संकलित कर प्रारूप तैयार किया गया। इसके बाद परीक्षण और विचार-विमर्श के माध्यम से इसे कानून का रूप दिया गया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों और समानता को मजबूत करना इस पहल के महत्वपूर्ण उद्देश्यों में शामिल है।
नकल विरोधी कानून के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक जैसी घटनाओं से मेहनत करने वाले युवाओं का विश्वास प्रभावित होता था। गरीब और सामान्य परिवारों के बच्चे सीमित संसाधनों में तैयारी करते हैं, इसलिए उनकी मेहनत और भविष्य की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पारदर्शी भर्ती व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों के परिणामस्वरूप हजारों युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर मिले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं को यह भरोसा होना चाहिए कि उनकी मेहनत, योग्यता और प्रतिभा का सम्मान होगा।
उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था, सामाजिक सौहार्द, सांस्कृतिक विरासत और जनहित से जुड़े विषयों पर सरकार निरंतर काम कर रही है। महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय उनका मूल उद्देश्य उत्तराखंड के हितों की रक्षा करना और राज्य को सुरक्षित, व्यवस्थित तथा विकसित भविष्य की ओर ले जाना है।
रिवर्स माइग्रेशन से लेकर होमस्टे तक, पहाड़ में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाओं पर की चर्चा
कार्यक्रम में एक कंटेंट क्रिएटर ने रिवर्स माइग्रेशन अर्थात गांवों की ओर वापस लौटने की प्रक्रिया के संबंध में सवाल किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन, धार्मिक यात्राओं, स्थानीय उत्पादों और स्वरोजगार के बढ़ते अवसरों से लोगों के लिए अपने गांवों में रहकर आजीविका अर्जित करने की संभावनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने इस संदर्भ में रिवर्स माइग्रेशन से जुड़े प्रयासों का उल्लेख करते हुए लगभग 44 प्रतिशत रिवर्स माइग्रेशन का आंकड़ा साझा किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि होमस्टे, स्वयं सहायता समूह, स्थानीय उत्पादों की बिक्री और विभिन्न सरकारी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में सहायक हैं। पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय युवाओं को गाइड, टैक्सी सेवा, भोजनालय, होमस्टे और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़ने के अवसर मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पहले पर्यटन का आर्थिक लाभ अनेक क्षेत्रों में सीमित अवधि तक रहता था, लेकिन नए पर्यटन उत्पादों, शीतकालीन पर्यटन और अन्य गतिविधियों को प्रोत्साहित करने से पर्यटन आधारित आजीविका को अधिक समय तक जारी रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यदि इन संभावनाओं को उचित सुविधाओं, बेहतर कनेक्टिविटी, स्थानीय उद्यमिता और प्रभावी प्रचार के साथ जोड़ा जाए, तो पलायन की चुनौती को कम करने और गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के लोगों को अपने क्षेत्र में ही आगे बढ़ने के अवसर मिलें और स्थानीय संसाधनों के माध्यम से उनकी आजीविका मजबूत हो।
‘वेडिंग डेस्टिनेशन उत्तराखंड’ को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए क्रिएटर्स से मांगे सुझाव
कार्यक्रम में एक महिला कंटेंट क्रिएटर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश में विवाह समारोह आयोजित करने के आह्वान का उल्लेख करते हुए पूछा कि उत्तराखंड को वैश्विक वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए सरकार की क्या योजनाएं हैं।
मुख्यमंत्री ने उत्तर देते हुए कहा कि उत्तराखंड में विवाह पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं और राज्य सरकार इस दिशा में पहले से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड का आध्यात्मिक और प्राकृतिक परिवेश विवाह जैसे मांगलिक अवसर के लिए विशेष आकर्षण रखता है।
मुख्यमंत्री ने त्रियुगीनारायण का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्थल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशिष्ट महत्व रखता है। इसके अतिरिक्त मसूरी, देहरादून, ऋषिकेश, रामनगर, मुक्तेश्वर और अन्य क्षेत्रों में भी विवाह समारोहों के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। राज्य में नए वेडिंग डेस्टिनेशन विकसित करने और संबंधित सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बेहतर होटल सुविधाएं, सड़क संपर्क, हवाई सेवाएं और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अन्य व्यवस्थाएं विवाह पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक होंगी। मुख्यमंत्री ने कंटेंट क्रिएटर्स से आग्रह किया कि वे उत्तराखंड के प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिवेश को विवाह पर्यटन के लिए उपयुक्त गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करें। साथ ही उन्होंने इस नीति को और प्रभावी बनाने के लिए उनके सुझावों का स्वागत किया।
फिल्म शूटिंग और फिल्म सिटी की संभावनाओं पर कलाकारों से किया संवाद
कार्यक्रम में मुंबई सहित फिल्म जगत से जुड़े उत्तराखंड के कलाकारों ने प्रदेश में फिल्म सिटी स्थापित करने और स्थानीय स्तर पर फिल्म निर्माण की सुविधाएं विकसित करने का सुझाव दिया। कलाकारों ने कहा कि उत्तराखंड में फिल्म शूटिंग के लिए अनुकूल प्राकृतिक स्थल उपलब्ध हैं। यदि प्रदेश में फिल्म निर्माण से जुड़ी सुविधाएं बढ़ाई जाएं, तो स्थानीय प्रतिभाओं को अपने गृह प्रदेश में ही काम करने के अवसर मिल सकते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कलाकारों की बात ध्यानपूर्वक सुनी और कहा कि उत्तराखंड में फिल्म शूटिंग तथा मनोरंजन उद्योग से जुड़ी गतिविधियों की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कलाकारों के सुझावों को महत्वपूर्ण बताते हुए इस दिशा में संभावनाओं पर काम करने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक विविधता, पर्वतीय दृश्य, नदियां, जंगल, पारंपरिक गांव और सांस्कृतिक परिवेश फिल्म निर्माण के लिए विशिष्ट अवसर उपलब्ध कराते हैं। फिल्म और मनोरंजन उद्योग से जुड़ी गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों, युवाओं, होटल व्यवसायियों और अन्य सेवा प्रदाताओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
बेहतर कनेक्टिविटी और नए पर्यटन स्थलों से उत्तराखंड को मिलेगी नई गति
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सड़क, हवाई और हेलीकॉप्टर सेवाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केवल किसी स्थल का प्रचार पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां तक पहुंचने की सुविधा और पर्यटकों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि दिल्ली-देहरादून मार्ग पर बेहतर कनेक्टिविटी, हवाई सेवाओं का विस्तार, पंतनगर एयरपोर्ट के विकास की दिशा में प्रयास और पर्वतीय क्षेत्रों में हेलीपैड तथा हेली सेवाओं को बढ़ाने की पहल से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंच आसान बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि माणा जैसे सीमावर्ती गांवों को नई पहचान देने, चकराता और हनोल जैसे क्षेत्रों की पर्यटन संभावनाओं को विकसित करने तथा नए गंतव्यों को सामने लाने के लिए योजनाबद्ध प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बुनियादी सुविधाओं, संपर्क मार्गों और पर्यटन संबंधी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स से कहा कि वे इन प्रयासों के साथ-साथ उत्तराखंड की उन विशिष्टताओं को भी सामने लाएं, जो अभी व्यापक रूप से लोगों तक नहीं पहुंची हैं। इससे राज्य के पर्यटन को विविधता मिलेगी और स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक अवसर बढ़ेंगे।
मुख्यमंत्री ने साझा किया अपनी जीवन यात्रा का अनुभव, युवाओं को मेहनत और आत्मनिर्भरता का संदेश
कार्यक्रम के दौरान एक कंटेंट क्रिएटर ने मुख्यमंत्री से उनकी व्यक्तिगत जीवन यात्रा, सामान्य ग्रामीण पृष्ठभूमि से प्रदेश के नेतृत्व तक पहुंचने के अनुभव और व्यस्त दिनचर्या के बीच ऊर्जा बनाए रखने के बारे में सवाल किया।
मुख्यमंत्री ने सहजता से अपनी जीवन यात्रा के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनका बचपन एक सामान्य ग्रामीण परिवेश में बीता। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त की और आगे की पढ़ाई विभिन्न स्थानों पर पूरी की। छात्र जीवन में उन्होंने हॉस्टल में रहते हुए भी अनेक अनुभव प्राप्त किए। उन्होंने कहा कि जीवन की शुरुआती चुनौतियां व्यक्ति को परिस्थितियों का सामना करना सिखाती हैं और कठिन समय में भी आगे बढ़ने का आत्मविश्वास देती हैं।
मुख्यमंत्री ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में छोटे-बड़े सभी काम सीखने चाहिए। खाना बनाना, अपने दैनिक कार्य स्वयं करना, मेहनत करना और जिम्मेदारियों को समझना आत्मनिर्भरता के महत्वपूर्ण गुण हैं। उन्होंने अपने ग्रामीण जीवन के अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने खेतों में काम किया है और खेती-किसानी से जुड़े विभिन्न कार्यों को नजदीक से समझा है।
उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए मेहनत, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों से सीखने की क्षमता जरूरी है। युवाओं को अपनी पृष्ठभूमि या संसाधनों की सीमाओं को बाधा मानने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बनाना चाहिए।
अनुशासित जीवनशैली और जनता का विश्वास है ऊर्जा का आधार
मुख्यमंत्री ने अपनी व्यस्त दिनचर्या और ऊर्जा बनाए रखने के संबंध में पूछे गए सवाल पर कहा कि जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन करने के लिए अनुशासित जीवनशैली आवश्यक है। योग, ध्यान, शारीरिक गतिविधि, संतुलित खानपान और नियमित दिनचर्या व्यक्ति को सक्रिय बनाए रखने में मदद करते हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में दिनभर बैठकों, विभिन्न क्षेत्रों के भ्रमण और जनसमस्याओं के समाधान से जुड़े कार्यों के बीच समय का प्रबंधन महत्वपूर्ण है। हालांकि, उनके लिए ऊर्जा और प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत जनता के बीच जाना, लोगों का स्नेह प्राप्त करना और उनका विश्वास महसूस करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का विश्वास उन्हें निरंतर काम करने और प्रदेश के विकास के लिए अधिक समर्पण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कार्य करने के प्रति समर्पण और सक्रियता से प्रेरणा मिलने की बात भी कही।
हरिद्वार कुंभ की व्यवस्थाओं में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता पर विशेष ध्यान
कार्यक्रम में हरिद्वार की एक युवा कंटेंट क्रिएटर ने आगामी कुंभ की तैयारियों, व्यवस्थाओं और स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाओं के संबंध में सवाल किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, श्रद्धा और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। हरिद्वार में मां गंगा के तट पर आयोजित होने वाले कुंभ का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इसलिए सरकार का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने कहा कि कुंभ की तैयारियों में घाटों के विकास, यातायात प्रबंधन, पार्किंग, आवागमन, सुरक्षा, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाओं को ध्यान में रखा जा रहा है। साधु-संतों और संबंधित पक्षों के साथ संवाद एवं समन्वय भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कुंभ की सफलता सामूहिक सहभागिता और सहयोग से ही सुनिश्चित होती है।
मुख्यमंत्री ने युवाओं और कंटेंट क्रिएटर्स को कुंभ की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्ता को सकारात्मक ढंग से प्रस्तुत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से पर्यटन, स्थानीय व्यापार और सेवा क्षेत्र को भी प्रोत्साहन मिलता है।
युवाओं से आत्मीय संवाद के साथ मुख्यमंत्री ने दिया सकारात्मक और जिम्मेदार कंटेंट का संदेश
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न प्रश्नों का उत्तर देते हुए स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया केवल मनोरंजन या लोकप्रियता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, जानकारी पहुंचाने, स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने और विकास की संभावनाओं को विस्तार देने का सशक्त साधन है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की नई पीढ़ी तकनीक और डिजिटल माध्यमों से गहराई से जुड़ी हुई है। कंटेंट क्रिएटर्स अपनी रचनात्मकता के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक पहचान, प्राकृतिक संपदा, पर्यटन, स्थानीय उद्यमिता और विकास की कहानियों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि उनकी प्रतिभा और डिजिटल पहुंच प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण संपत्ति है। आवश्यकता इस बात की है कि वे अपनी क्षमता का उपयोग सकारात्मक, तथ्यपरक और रचनात्मक कार्यों में करें। इससे उत्तराखंड की पहचान मजबूत होगी और स्थानीय समाज को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
‘शाइनिंग स्टार्स ऑफ उत्तराखंड-2026’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न कंटेंट क्रिएटर्स को सम्मानित भी किया। उन्होंने उनकी उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम ने प्रदेश की प्रतिभाओं, डिजिटल क्रिएटर्स और राज्य सरकार के बीच संवाद एवं सहयोग की नई संभावनाओं को सामने रखा।
कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक पवनदीप राजन, यूट्यूबर सौरव जोशी, अवंतिका भट्ट, सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर तनु रावत, आरजे काव्या, प्रियंका कंडवाल और आशा नेगी सहित उत्तराखंड के विभिन्न प्रमुख कंटेंट क्रिएटर्स, सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स, गायक, अभिनेता तथा फिल्म जगत से जुड़ी अन्य प्रतिभाएं उपस्थित रहीं।

