योगी-भागवत की ‘बंद कमरे’ में 35 मिनट की चर्चा: क्या UP में होने वाला है कोई बड़ा सियासी उलटफेर?
लखनऊ | 18 फरवरी, 2026
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार की शाम उस वक्त सियासी पारा चढ़ गया, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत से मुलाकात की। निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में हुई यह मुलाकात लगभग 35 मिनट तक चली। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसे एक ‘शिष्टाचार भेंट’ बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके गहरे मायने निकाले जा रहे हैं।
एकांत में हुई ‘गुफ्तगू’ और सियासी अटकलें
संघ प्रमुख मोहन भागवत अपने दो दिवसीय लखनऊ प्रवास के अंतिम दिन थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रात करीब 8 बजे उनसे मिलने पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, दोनों के बीच बातचीत पूरी तरह एकांत में हुई, जिसमें न तो कोई मंत्री मौजूद था और न ही कोई अधिकारी।
माना जा रहा है कि इस 35 मिनट की बैठक में उत्तर प्रदेश के आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति, संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में बड़े फेरबदल को लेकर गंभीर चर्चा हुई है।
इन 5 मुद्दों पर केंद्रित रही मुलाकात (सूत्रों के अनुसार):
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मिशन 2027 की नींव: संघ और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बिठाकर विधानसभा चुनाव में ‘जीत की हैट्रिक’ लगाने का खाका।
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संगठनात्मक बदलाव: यूपी बीजेपी के संगठन में रिक्त पदों और नए चेहरों को जगह देने पर मंथन।
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शताब्दी वर्ष अभियान: संघ के 100 साल पूरे होने पर प्रदेश में चल रहे सामाजिक समरसता अभियानों की समीक्षा।
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जातिगत समीकरण: विपक्षी दलों की घेराबंदी के बीच हिंदू समाज को एकजुट करने और सामाजिक सद्भाव बढ़ाने पर जोर।
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सरकारी कामकाज का फीडबैक: संघ की ओर से धरातल पर मिल रहे फीडबैक के आधार पर शासन में सुधार की चर्चा।
महज शिष्टाचार या बड़े बदलाव की आहट?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संघ प्रमुख का हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश पर विशेष फोकस रहा है। वे लगातार गोरखपुर, अयोध्या और अब लखनऊ के दौरों पर हैं। इससे पहले अयोध्या में भी सीएम योगी और भागवत के बीच 90 मिनट लंबी बातचीत हुई थी। बार-बार होने वाली ये मुलाकातें इस बात का संकेत हैं कि 2027 की जंग के लिए संघ ने अभी से मोर्चा संभाल लिया है।
