ममता का इस्तीफा देने से इनकार, समर्थन में उतरी शिवसेना: संजय राउत बोले- “ममता का कदम लोकतंत्र बचाने की लड़ाई”
नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के चौंकाने वाले परिणामों के बाद देश की राजनीति में एक बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक गतिरोध पैदा हो गया है। 294 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा को 207 सीटें मिलने के बावजूद, निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है। ममता के इस फैसले का शिवसेना-यूबीटी के फायरब्रांड नेता संजय राउत ने पुरजोर समर्थन किया है।
ममता का फैसला सत्ता का मोह नहीं, विरोध का प्रतीक: संजय राउत
संजय राउत ने ममता बनर्जी के कदम को केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ एक ‘ऐतिहासिक विरोध’ करार दिया है। राउत ने कहा कि यह केवल कुर्सी बचाने की कोशिश नहीं है, बल्कि देश के लोकतंत्र को तानाशाही से बचाने की एक बड़ी लड़ाई है।
चुनाव आयोग पर तीखा हमला: “संस्था बन चुकी है केंद्र की गुलाम”
संजय राउत ने निर्वाचन आयोग (ECI) की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे ‘तानाशाही का हथियार’ बताया। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा:
“चुनाव आयोग पूरी तरह से केंद्र सरकार की कठपुतली बन चुका है। विपक्षी दलों को अब यह गंभीरता से सोचना होगा कि क्या मौजूदा व्यवस्था में चुनाव लड़ना भी चाहिए या नहीं।”
“यह जनादेश नहीं, गहरी साजिश है” – ममता बनर्जी
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को घोषणा की कि वह हार स्वीकार नहीं करेंगी। 294 सदस्यीय सदन में टीएमसी के 80 सीटों पर सिमटने के बावजूद, उन्होंने इसे जनता का फैसला मानने से इनकार कर दिया। ममता बनर्जी का दावा है कि:
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चुनाव परिणामों में बड़े पैमाने पर धांधली और साजिश हुई है।
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उनकी लड़ाई भाजपा के खिलाफ नहीं, बल्कि ‘पक्षपाती चुनाव आयोग’ के खिलाफ थी।
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परिणामों को संवैधानिक और कानूनी तौर पर चुनौती दी जाएगी।
महाराष्ट्र की घटना से लिया सबक: उद्धव ठाकरे का समर्थन
संजय राउत ने इस दौरान 2022 के महाराष्ट्र राजनीतिक संकट का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह उद्धव ठाकरे के इस्तीफे के बाद कानूनी पेंच फंसे थे, ममता बनर्जी वह गलती नहीं दोहराएंगी। उन्होंने बताया कि उद्धव ठाकरे ने स्वयं ममता बनर्जी को फोन कर अपना समर्थन व्यक्त किया है।
इंडिया गठबंधन के अधिकतर शीर्ष नेताओं ने ममता बनर्जी के इस रुख के साथ एकजुटता दिखाई है, जिससे केंद्र बनाम विपक्ष की यह लड़ाई अब दिल्ली की दहलीज तक पहुँच गई है।
