तमिलनाडु में ‘विजय’ का शंखनाद: द्रविड़ किलों को ढहाकर सत्ता की ओर बढ़ी TVK, 100+ सीटों पर थलापति का जादू
सुपरस्टार विजय का ‘सियासी धमाका’, टीवीके (TVK) बनी सबसे बड़ी शक्ति; फ्री गोल्ड और AI के वादों ने जिताया चुनाव
चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में आज यानी 4 मई 2026 का दिन एक नए युग की शुरुआत के रूप में दर्ज हो गया है। फिल्मी पर्दे पर राज करने वाले ‘थलापति’ विजय ने चुनावी मैदान में भी अपनी बादशाहत साबित कर दी है। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने दशकों पुराने द्रविड़ किलों— DMK और AIADMK को ढहाते हुए बहुमत की ओर कदम बढ़ा दिए हैं।
रुझानों में ‘विजय’ का करिश्मा
ताजा रुझानों के अनुसार, विजय की पार्टी 100 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। खुद विजय पेरांबुर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट दोनों ही सीटों से भारी अंतर से आगे चल रहे हैं। राज्य में हुआ 85% का रिकॉर्ड मतदान इस बात का स्पष्ट संकेत था कि तमिलनाडु की जनता इस बार बदलाव के मूड में थी।
मास्टरस्ट्रोक: घोषणापत्र के वो वादे जिन्होंने पलटी बाजी
विजय की जीत के पीछे उनके ‘वेलफेयर मॉडल’ को सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है। उन्होंने जनता की बुनियादी जरूरतों और भविष्य की तकनीक के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाया:
महिलाओं के लिए खास: गरीब बेटियों की शादी के लिए 8 ग्राम सोना और सिल्क साड़ी, साथ ही गृहणियों को ₹2,500 मासिक सहायता।
युवाओं और तकनीक पर जोर: देश का पहला ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) मंत्रालय बनाने का वादा और बेरोजगारों को ₹4,000 तक का मासिक भत्ता।
आम राहत: 200 यूनिट मुफ्त बिजली और ₹25 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance)।
किसानों को सहारा: कर्ज माफी और फसलों पर ₹3,500 प्रति क्विंटल का MSP।
कांटों भरा ताज: चुनौतियां हैं अपार
जीत भले ही शानदार हो, लेकिन विजय की राह आसान नहीं है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक अनुभव की कमी और 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को पूरा करना है। विपक्ष में डीएमके और एआईएडीएमके जैसे अनुभवी खिलाड़ी हैं, जो सदन में उनकी घेराबंदी करेंगे। साथ ही, ब्यूरोक्रेसी के साथ तालमेल बिठाना और अपने भारी-भरकम वादों के लिए बजट जुटाना विजय के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा।
