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उत्तराखंड में राजस्व सेवाओं का डिजिटल धमाका: सीएम धामी ने लॉन्च किए 6 वेब पोर्टल, अब घर बैठे मिलेगी सत्यापित खतौनी

 

देहरादून | 10 जनवरी, 2026

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में राजस्व विभाग के कार्यों को पूरी तरह डिजिटल बनाने के उद्देश्य से 6 नए वेब पोर्टल का शुभारंभ किया। अब प्रदेश के नागरिकों को खतौनी, भू-नक्शा और ऋण संबंधी कार्यों के लिए तहसीलों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। ये सेवाएं अब मोबाइल और इंटरनेट पर एक क्लिक पर उपलब्ध होंगी।

इन 6 पोर्टलों से बदलेगी राजस्व व्यवस्था

मुख्यमंत्री द्वारा शुरू किए गए पोर्टलों में ई-भूलेख (अपडेटेड वर्जन), भू-नक्शा, भूलेख अंश, भू-अनुमति, एग्री लोन और ई-वसूली पोर्टल शामिल हैं।

ई-भूलेख (सत्यापित खतौनी): अब नागरिक घर बैठे ऑनलाइन शुल्क जमा कर खतौनी की ‘सत्यापित प्रति’ प्राप्त कर सकेंगे। पहले इसके लिए तहसील जाना अनिवार्य था।

भूलेख अंश पोर्टल: इसमें संयुक्त खातेदारों का अलग-अलग अंश (हिस्सा) निर्धारित कर डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इससे किसानों की ‘फार्मर रजिस्ट्री’ बनाने में आसानी होगी।

भू-अनुमति पोर्टल: उद्योग और कृषि प्रयोजनों के लिए भूमि खरीद की अनुमति अब पूरी तरह ऑनलाइन मिलेगी। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में कृषि व बागवानी हेतु अनुमति प्रक्रिया को भी डिजिटाइज कर दिया गया है।

एग्री-लोन पोर्टल: किसान अपनी भूमि के सापेक्ष ऋण लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। ऋण चुकाने के बाद बैंक द्वारा एनओसी जारी होते ही पोर्टल से ‘चार्ज’ स्वतः हट जाएगा।

 

ई-वसूली पोर्टल (RCS): बैंक या अन्य विभाग अपने बकायेदारों से वसूली के प्रकरण ऑनलाइन कलेक्टर को भेज सकेंगे, जिसकी ट्रैकिंग हर स्तर पर संभव होगी।

भू-नक्शा पोर्टल: अब कोई भी व्यक्ति अपनी भूमि का मानचित्र (कैडस्ट्रल मैप) पब्लिक डोमेन में निःशुल्क देख सकेगा।

ईज ऑफ लिविंग और पारदर्शिता पर जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप आईटी और एआई (AI) के माध्यम से जनसुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। सरकार ‘सरलीकरण, समाधान और निस्तारण’ के संकल्प पर काम कर रही है। इन पोर्टलों से न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता आएगी, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी रोक लगेगी और लोगों के समय की बचत होगी।

 

कार्यक्रम में प्रमुख उपस्थिति

इस अवसर पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव राजस्व एस.एन पांडेय, आयुक्त राजस्व परिषद रंजना राजगुरु, अपर सचिव आनंद श्रीवास्तव और एनआईसी के वरिष्ठ निदेशक मनीष वालिया उपस्थित रहे। राज्य के सभी जिलाधिकारियों और मंडलायुक्तों ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया।

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